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Kalonji ke Fayde in Hindi I कलौंजी के तेल के फायदे I Black Seed Oil

 Kalonji Ke Fayde in Hindi I कलौंजी के तेल के फायदे I Black Seed Oil

 कलोंजी  के विषय में एविसिना ने अपनी किताब ‘केनन ऑफ मेडीसिन’ में लिखा है कि कलौंजी शरीर को ताकत से भर देती है, कमज़ोरी व थकान दूर करती है तथा पाचन तंत्र, श्वसन तंत्र तथा प्रजनन तंत्र की बीमारियों का इलाज करती है। कलौंजी तिब-ए-नब्वी की दवाओं की सूची या पैग़ंबर मौहम्मद की दवाओं में भी शामिल है। इस्लाम धर्म के अनुसार, हज़रत मौहम्मद (S.A.W.) कलौंजी को मौत के सिवा हर मर्ज की दवा बताते थे। इसका ज़िक्र कई जगह हदीसों में मिलता है जैसे कि, साहीह मुस्लिम: 26 किताब अस सलाम, संख्या 5489.


  अनेक गुणों से भरपूर है कलौंजी ।

 कलौंजी के बीज छोटे, गोल ओर काले रंग के होते है जिनमे कैल्शियम, मिनरल्स और विटामिन्स भरपूर मात्रा में पाया जाता है। इसी वजह से कलौंजी का उपयोग बहुत सारे रोगों को दूर भगाने के लिए किया जाता है। ऐसे तो कलौंजी मुख्यत एक खाद्य पदार्थ के रूप में इस्तेमाल की जाती है लेकिन इसके अनेक लाभ है। इसे अंग्रेजी में ब्लैक सीड (Black Seed) कहते हैं और इसका साइंटिफिक नाम निगेल्ला सटिवा (Nigella Sativa) हैं। 

कलोंजी हमारे मुल्क भारत के लगभग हर किचन में मिल जाती है। कलौंजी एक बेहद उपयोगी मसाला है. इसका प्रयोग विभिन्न व्यंजनों, जैसे दालों, सब्जियों, नान, ब्रेड, केक और आचार आदि में किया जाता है. इसकी अलग से सब्जी भी बनाई जाती है.  कलौंजी में मौजूद दो बेहद प्रभावकारी तत्व थाइमोक्विनोन (thymoquinone) और थाइमोहाइड्रोक्विनोन (thymohydroquinone) मिलकर सभी बीमारियों से लड़ने और शरीर को हील करने में मदद करते हैं और शरीर की हर समस्या के समाधान में मदद करते हैं। आप जानकर हैरान होंगे की कलोंजी कार्डियोवेस्कुलर डि‍सीज, अस्थमा, कैंसर  ब्लड कैंसर, फेफड़ों की समस्या, लिवर, प्रोस्टेट, ब्रेस्ट कैंसर, सर्विक्स,  त्वचा रोगों में और कलौंजी डायबिटीज़ से बचाता है, पिंपलस, सिरदर्द, ब्लड प्रेशर कंट्रोल, मेमोरी पावर बढ़ाने में, आंखों की रोशनी, आदि तक में उपयोगी और लाभकारी है. कलौंजी का तेल कफ को नष्ट करता है, और रक्तवाहिनी नाड़ियों को साफ़ करता है।  यह खून में मौजूद दूषित अनावश्यक द्रव्य को भी दूर करता  है, और बालो को गिरने से रोकता है एवं बालो को घना और लम्बा भी करता है।  कलौंजी का तेल सुबह ख़ाली पेट और रात को सोते समय लेने से बहुत से रोग समाप्त हो जाते हैं। अतः आप भी एक बड़ी चम्मच कलौंजी के तेल को एक बड़ी चम्मच शहद के साथ रोज सुबह लें। आप तंदुरूस्त रहेंगे और कभी बीमार नहीं होंगे; स्वस्थ और निरोग रहेंगे। 

 तो देखा आपने, दुकान पर आसानी से मिलने वाले कलौंजी के तेल में कितने सारे फायदे छुपे हुए हैं. अगर आप भी हमेशा स्वस्थ और तंदरुस्त रहना चाहते हैं तो रोज़ाना कलौंजी का तेल इस्तेमाल कीजिए.

 विभिन रोगों में कलौंजी के बीजों/तेल का उपयोग कैसे करें ?

Kalonji ke Fayde in Hindi I कलौंजी के तेल के फायदे I Black Seed Oil

बाल गिरने की समस्या:

  • अपने सिर पर 20 मिनट तक निम्बू की मसाज करें और इसके पश्चात अपना सिर धो ले। बाल धोकर सुखाने के बाद, इसपर कलौंजी के तेल की मालिश करे. आपको एक सप्ताह के अंदर ही इसका परिणाम दिखने लगे जाएगा । अगर मास्क के रूप में इस्तेमाल करना चाहती है, तो ओलिव आयल को कलौंजी के तेल में मिलाये ओर उसमे थोड़ा मेहंदी पाउडर मिलाकर हल्का सा गरम कर ले। अब इसे अपने बालों पर थोड़ी देर रहने देने के बाद, धो ले. आपको इससे गंजेपन से राहत मिलेगी।

  • कलौंजी की राख को ऑलिव ऑयल में मिलाकर मसाज करने से नए बाल आना शुरू हो जाएंगे.

  • बालों में रुसी होने पर दस ग्राम कलौंजी का तेल, 30 ग्राम जैतून का तेल हल्का गर्म करें उसमें 30 ग्राम पिसी हुई मेहंदी को मिलाकर बालों में लगाएं और एक घंटे बाद बालों को धोकर शैंपू कर लें.

 

 
 सुंदर और आकर्षक चेहरे के लिए :

  •   अगर कलौंजी को जैतून के तेल के साथ सुबह सवेरे खाएं, तो रंग एकदम लाल सुर्ख हो जाता है. चेहरे को सुन्दर व आकर्षक बनाने के लिए कलौंजी के तेल में थोड़ा सा जैतून का तेल मिलाकर चेहरे पर लगाएं और थोड़ी देर बाद चेहरा धो लें. इससे चेहरे के दाग़-धब्बे दूर होते हैं। 

  • एक चम्मच कलौंजी का तेल, एक चम्मच जैतून का तेल मिलाकर चेहरे पर मसाज करें और एक घंटे बाद चेहरा धो लें. कुछ दिनों में आपका चेहरा चमक उठेगा। 

 

 बुखार की समस्या :

अगर आपको बार बार बुखार आ रहा है,  दवा खाने से उतर जा रहा है, फिर चढ़ जा रहा है, तो कलौंजी को पीस कर चूर्ण बना लीजिये. फिर, उसमे गुड मिलाकर, सामान्य लड्डू के आकार के लड्डू बना लीजिये. रोज एक लड्डू खाना है 5 दिनों तक. बुखार तो पहले दिन के बाद दोबारा चढ़ने का नाम नहीं लेगा पर आप 5 दिन तक लड्डू खाते रहिएगा, यही काम मलेरिया बुखार में भी कर सकते हैं. 

 

 दमा, खांसी, एलर्जी में :

1, दमा, खांसी और एलर्जी में इस प्रकार से प्रयोग करें कलोंजी/कलोंजी तेल: एक कप गर्म पानी में एक चम्मच शहद तथा आधा चम्मच कलौंजी का तेल मिलाकर सुबह भोजन से पूर्व पीना चाहिए, फिर रात में भोजन के बाद उसी प्रकार आधा चम्मच कलौंजी का तेल और एक चम्मच शहद गर्म पानी में मिलाकर इस मिश्रण का सेवन करना चाहिए. इस प्रकार 40 दिनों तक प्रतिदिन दो बार पियें .

 नोट: ठंडे पदार्थ वर्जित हैं.

2. खांसी और दमा की शिकायत होने पर छाती और पीठ पर कलौंजी के तेल की मालिश करें, तीन चम्मच कलौंजी का तेल रोज़ पीएं और पानी में तेल डालकर उसकी भाप लें. 

 गैस/पेट फूलने की समस्या :

50 ग्राम जीरा, 25 ग्राम अजवायन, 15 ग्राम कलौंजी अलग-अलग भून कर पीस लें और उन्हें एक साथ मिला दें. अब 1 से 2 चम्मच मीठा सोडा, 1 चम्मच सेंधा नमक तथा 2 ग्राम हींग शुद्ध घी में पका कर पीस लें. सबका मिश्रण तैयार कर लें. गुनगुने पानी की सहायता से 1 या आधा चम्मच खाएं.

 मधुमेह/डायबीटिज़ :

  •  एक कप काली चाय में आधा चाय का चम्मच कलौंजी का तेल मिलाकर सुबह नाश्ते से पहले पियें।  फिर रात को खाना खाने के बाद सोने से पहले एक कप चाय में एक चम्मच कलौंजी का तेल मिलाकर पीना चाहिए। 

  •  डायबीटिज़ के मरीज़ों को एक कप कलौंजी के बीज, एक कप राई, आधा कप अनार के छिलके को पीस कर चूर्ण बनाना चाहिए. आधे चम्मच कलौंजी के तेल के साथ इस चूर्ण को रोज़ नाश्ते के पहले एक महीने तक लेने से आराम मिलता है.

  •  चिकनाई वाले पदार्थों के उपयोग से बचें. इस इलाज के साथ अंगे्रजी दवा का उपयोग होता है तो उसे जारी रखें और बीस दिनों के बाद शर्करा की जांच करा लें. यदि शक्कर नार्मल हो गई हो तो अंग्रेजी दवा बंद कर दें, लेकिन कलौंजी का सेवन करते रहें। 

 हृदय रोग और ब्लड प्रेशर :

  • एक कप दूध में आधा चम्मच कलौंजी का तेल मिलाकर प्रतिदिन दो बार प्रयोग करें. इस तरह दस दिनों तक उपचार चलता रहे। 

  •  चिकनाई वाले पदार्थों का सेवन न करें. जब भी कोई गर्म पेय लें, उसमें एक चम्मच कलौंजी का तेल मिला लें. तीन दिन में एक बार पूरे शरीर पर तेल की मालिश करके आधा घंटा धूप का सेवन करें. लगातार एक महीने तक ऐसा करने से पीड़ित को आराम मिल जायेगा .

 अपच या पेट दर्द में :

कलौंजी का काढा बनाइये. फिर, उसमे काला नमक मिलाकर सुबह शाम पीजिये. दो दिन में ही आराम देखिये.

 सफेद दाग और लेप्रोसीः

15 दिन तक रोज पहले सेब का सिरका मलें, फिर कलौंजी का तेल मलें.

 तनाव :

एक चाय की प्याली में एक बड़ी चम्मच कलौंजी का तेल डाल कर लेने से मन शांत हो जाता है और तनाव के सारे लक्षण ठीक हो जाते हैं.

 नेत्र रोगों की चिकित्सा :

  • नेत्रों की लाली, मोतियाबिंद, धुंधला दिखना, आंखों से पानी का जाना, आंखों की तकलीफ और आंखों की नसों का कमजोर होना आदि में एक कप गाजर के जूस में आधा चम्मच कलौंजी का तेल दो चम्मच शहद मिलाकर दिन में दो बार सुबह और रात में सोते समय लेना चाहिए. इस प्रकार 40 दिनों तक जारी रखें.

  • नेत्रों को धूप की गर्मी से बचाएं. इससे यह सभी समस्याएं दूर हो जाती है. रोज़ सोने के पहले पलकों और आंखों के आस-पास कलौंजी का तेल लगाने से नेत्र रोग से पीड़ित व्यक्ति को फायदा होता है.

याददाश्त बढाने के लिए:

और मानसिक चेतना के लिए : एक छोटी चम्मच कलौंजी का तेल 100 ग्राम उबले हुए पुदीने के साथ सेवन करें.

 पथरी के लियें :

कलौंजी को पीस कर पानी में मिलाइए फिर उसमे शहद मिलाकर पीजिये, 10 -11 दिन प्रयोग करके टेस्ट करा लीजिये, कम न हुई हो तो फिर 10 -11 दिन पीजिये.

कमर दर्द और गठिया :

कलौंजी के तेल को हल्का गर्म करके जहां दर्द हो वहां मालिश करें. और एक चम्मच कलौंजी का तेल दिन में तीन बार सेवन करें. 15 दिन मे बहुत आराम मिलेगा.

 गर्भवती के पेट में बच्चे का मर जाना:

तो उसे कलौंजी उबाल कर पिला दीजिये, बच्चा निकल जायेगा और गर्भाशय भी साफ़ हो जाएगा.

 बार-बार हिचकी आना:

तो कलौंजी के चुटकी भर पावडर को ज़रा से शहद में मिलकर चटा दीजिये.

 पागल कुत्ते के काटने पर:

तो आधा चम्मच से थोडा कम करीब तीन ग्राम कलौंजी को पानी में पीस कर पिला दीजिये, एक दिन में एक ही बार 3-4 दिन तक करे.

 सिरदर्द और जुकाम  :

इसके बीजों को गरम कीजिए ,मलमल के कपडे में बांधिए और सूंघते रहिये. दो दिन में ही जुकाम और सर दर्द दोनों गायब . जब सर्दी के मौसम में सरदर्द सताए, तो कलौंजी और जीरे की चटनी पीसिये और मस्तक पर लेप कर लीजिये.

लगातार सिरदर्द होने पर माथे और सिर के दोनों तरफ कान के आस-पास कलौंजी का तेल लगाएं और नाश्ते के पहले एक चम्मच तेल का सेवन करें. कुछ सप्ताह बाद सिरदर्द पूरी तरह से खत्म हो जाएगा.

 सफेद दाग और कुष्ठ रोग :

शरीर पर सफेद दाग और कुष्ठ रोग हो जाने पर 15 दिन तक रोज़ाना पहले सेब का सिरका शरीर पर मलें फिर कलौंजी का तेल मलें.

कलौंजी का उपयोग चर्म रोग की दवा बनाने में भी होता है. कलौंजी को पीस कर सिरके में मिलकर पेस्ट बनाए और मस्सों पर लगा लीजिये. मस्से कट जायेंगे. मुंहासे दूर करने के लिए कलौंजी और सिरके का पेस्ट रात में मुंह पर लगा कर सो जाएँ.

 

 महिलाओं के यूट्रस (बच्चेदानी) को सेहतमंद बनाने के लिए :

डिलीवरी के बाद, कलौंजी का काढा 4 दिनों तक जरूर पी लेना चाहिए. काढ़ा बनाने के लिए दस ग्राम कलौंजी के दाने एक गिलास पानी में भिगायें, फिर 24 घंटे बाद उसे धीमी आंच पर उबाल कर आधा कर लीजिये. फिर, उसको ठंडा करके पी जाइये. साथ ही, नाश्ते में पचीस ग्राम मक्खन जरूर खा लीजियेगा. जितने दिन ये काढ़ा पीना है, उतने दिन मक्खन जरूर खाना है.

 किडनी स्टोन :

पाव भर पिसी हुई कलौंजी को शहद में अच्छी तरह से मिला लें. इसमें से दो चम्मच मिश्रण और एक चम्मच कलौंजी के तेल को एक कप गर्म पानी के साथ मिलाकर रोज़ नाश्ते से पहले लें. गुर्दे की पथरी से परेशान लोगों को कलौंजी का तेल फायदा करता है.

 स्त्री गुप्त रोग :

स्त्रियों के रोग जैसे, श्वेत प्रदर, रक्त प्रदर, डिलेवरी के बाद दुर्बलता व रक्त स्त्राव में कलौंजी का तेल काफी फायदेमंद होता है. थोड़े से पुदीने की पत्तियों को दो गिलास पानी में डालकर उबालें, आधा चम्मच कलौंजी का तेल डालकर दिन में दो बार पिएं. बैंगन अचार, अंडा और मछली से परहेज करें.

 पुरुष गुप्त रोग :

स्वप्न दोष, स्तंभन दोष, नपुंसकता जैसे रोगों में एक कप सेब के रस में आधा चम्मच तेल मिलाकर दिन में दो बार 21 दिन तक पिएं. थोड़ा सा तेल गुप्तांग पर रोज़ मलने से फायदा होता है.

 कैंसर के उपचार में :

कलौंजी में पर्याप्त मात्रा में एंटी-ऑक्सीडेंट्स मौजूद होते हैं जो कैंसर जैसी बीमारी से सुरक्षा प्रदान करने में सहायक होते हैं.

कलौजी के तेल की आधी बड़ी चम्मच को एक ग्लास अंगूर के रस में मिलाकर दिन में तीन बार लें.

 एचआईवी :

कलौंजी के औषधिय गुणों की जांच के लिए अमेरिका में एक शोध के दौरान एचआईवी पीड़ित व्यक्ति को रोज़ कलौंजी, लहसुन और शहद का कैप्सुल दिया गया. कुछ दिनों बाद यह पाया गया कि पीड़ित व्यक्ति में शरीर की रक्षा करनेवाली टी-4 और टी-8 लिंफेटिक कोशिकाओं की संख्या में आश्चर्यजनक रुप से बढ़ोत्तरी हुई थी.

कलौंजी के तेल के फायदे I

 
 ऊनी कपड़ों को रखते समय:

, उसमें कुछ दाने कलौंजी के डाल दीजिये,कीड़े नहीं लगेंगे.

 घर में कुछ ज्यादा ही कीड़े-मकोड़े निकल रहे हों:,

तो कलौंजी के बीजों का धुँआ कर दीजिये.

कलौंजी का तेल कैसे बनायें :

कलौंजी का तेल बनाने के लिए, 50 ग्राम कलौंजी पीसकर ढाई किलो पानी में उबालें. उबलते-उबलते जब यह केवल एक किलो पानी रह जाए, तो इसे ठंडा होने दें. इसका तेल निकलकर पानी के ऊपर तैरने लगता है. इस तेल पर हाथ फेरकर, तब तक कटोरी में पोछें जब तक पानी के ऊपर तैरता हुआ तेल खत्म न हो जाए. फिर इस तेल को छानकर, शीशी में भर लें और इसका प्रयोग औषधि के रूप में करें। 

आयुर्वेद कहता है कि इसके बीजों की ताकत सात साल तक नष्ट नहीं होती। 

 


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